कल्पना चावला पुण्यतिथि: आखिर क्या हुआ था उस दिन……..

नई दिल्ली:1 फरवरी 2003, वही दिन जब आसमान का एक सितारा आसमान में ही कहीं खो गया. वही सितारा जो 16 दिन अंतरिक्ष में बिताकर धरती पर लौट रहीं थी लेकिन धरती से सिर्फ 16 मिनट की दूरी पर जब यान था तब आसमान में बिजली कौंधी, धमाका हुआ, आग का शोला निकला और सब खत्म हो गया. कल्पना चावला ‘कल्पनालोक’ में खो चुकी थी. इस हादसे में कल्पना चावला सहित सात अंतरिक्ष यात्री सदा के लिए आकाश के हो गए.

हादसे में जिन सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हुई उसमें दो महिलाएं थीं, लॉरेल क्लार्क और कल्पना चावला. देश का नाम रौशन करने वाली कल्पना हरियाणा के करनाल में पैदा हुई. उन्होंने अपनी पढ़ाई भारत में की. उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कालेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. बाद में कल्पना अमेरिकी एजेंसी में काम करने लगी. जब यह हादसा हुआ तब चावला की यह दूसरी अंतरिक्ष यात्रा थी.

पिता चाहते थे डॉक्टर या टीचर बनें

कल्पना हरियाणा के करनाल में बनारसी लाल चावला के घर 17 मार्च 1962 को जन्मी थीं. अपने चार भाई-बहनों में वह सबसे छोटी थीं. प्यार से घर में उन्हें मोंटू पुकारा जाता था. कल्पना में 8वीं क्लास के दौरान ही अपने पिता से इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर कर दी थी, लेकिन उनके पिता की इच्छा थी कि वह डॉक्टर या टीचर बनें. उनकी शुरुआती पढ़ाई करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई. स्कूली पढ़ाई के बाद कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज 1982 में ग्रेजुएशन पूरा किया.

ग्रेजुएशन करने के बाद वह अमेरिका चली गईं और 1984 टेक्सस यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की. 1995 में कल्पना नासा में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर शामिल हुईं और 1998 में उन्हें अपनी पहली उड़ान के लिए चुना गया. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की. वो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई.

कल्पना चावला का निधन

इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी. पहले मिशन के सफलता के बाद न कल्पना ने और न उनके परिवार वालों ने सोचा होगा कि दूसरा मिशन उनका आखिरी मिशन होगा. 1 फरवरी 2003 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया.

इस हादसे पर फ्लोरिडा के अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन का झंडा आधा झुका दिया गया. आसमान से अंतरिक्ष यान का थोड़ा बहुत मलबा टेक्सास और लुईजियाना के आस पास गिरा. शटल प्रोग्राम मैनेजर रॉन डिटेमोर ने रुंधे गले से एलान किया, “हम तब तक उड़ान नहीं भरेंगे, जब तक इस हादसे के बारे में समझ न आ जाए. हमने जरूर कोई गलती की होगी.”

इस हादसे में कल्पना चावला की मौत हो गई लेकिन वह हमेशा जिंदा रहीं. उन्होंने अपनी जिंदगी को मिसाल की तरह पेश किया जिसकी वजह से आज भी लाखों बच्चियों को नई ऊर्जा और नई कल्पनाएं भरने का हौसला मिलता है.

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