मोदी सरकार के दौर में बेरोज़गारी दर ने तोड़ा 45 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली: देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे अधिक हो गई है. ये दावा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की उस रिपोर्ट के आधार पर किया गया है, जिसे सरकार की तरफ से जारी नहीं करने के विवाद के बीच नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन के दो सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस गहमागहमी के बीच एक अंग्रेजी अखबार ने एनएसएसओ की रिपोर्ट के हवाले से खबर छापी है और दावा किया है कि देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है, हालाकि, साल 2011-12 में ये बेरोजगारी की दर महज़ 2.2 फीसदी थी. रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 में शहरी क्षेत्र के पुरुष युवाओं में 18.7 फीसदी बेरोजगारी दर है जबकि महिलाओं में यह दर 27.2 फीसदी है.

ग्रामीण शिक्षित महिलाओं में बेरोजगारी की यह दर पिछले साल 17.3 फीसदी रही जबकि 2004-05 में यह 9.7 फीसदी से 15.2 फीसदी के बीच में थी. इस साल लेबर फोर्स भागीदारी रेट में भी गिरावट दर्ज की गई है. 2011-12 में जहां देश की आबादी के 39.5 फीसदी लोग काम करते थे वहीं यह दर घटकर 2011-12 में 36.9 फीसदी हो गई. इस दर में साल 2004 से ही गिरावट दर्ज की जा रही है.

आपको बता दें कि नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन से हाल ही में दो मेंबर ने इस्तीफा दिया है. उन दोनों के इस्तीफा का कारण सरकार की तरफ से बेरोजगारी से जुड़े एनएसएसओ की रिपोर्ट को जारी नहीं करने को माना जा रहा है. ये रिपोर्ट दिसंबर माह में ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन सरकार ने अब भी जारी नहीं किया है.

इस्तीफा देने वाले मेंबर्स की बात पर सरकार ने गुरुवार को कहा कि हमने उन्हें बता दिया था कि रिपोर्ट कब जारी की जाएगी, यह निर्णय सरकार का होगा. मोदी सरकार शुक्रवार को अपना अंतरिम बजट पेश करने वाली है. ऐसे में बजट से एक दिन पहले बेरोजागारी के इस डेटा के खुलासा होने से देश में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है.

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